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सफलता की सशक्त कहानी: स्व सहायता समूह से मिली ताकत, श्रीमती छाया सलामे बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा

सफलता की सशक्त कहानी
स्व सहायता समूह से मिली ताकत, श्रीमती छाया सलामे बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा

संवाददाता धनंजय जोशी

जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुर्णा। स्व सहायता समूहों की पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण जिले के ग्राम पैलेपार की निवासी श्रीमती छाया सलामे हैं, जिन्होंने स्व सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन में परिवर्तन किया, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।
श्रीमती छाया सलामे ने अपनी मेहनत और लगन से गांव में 8 स्व सहायता समूहों का गठन किया और सचिव के रूप में महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन से समूह की महिलाएं पशुपालन, सिलाई, अचार-पापड़ निर्माण जैसे छोटे-छोटे व्यवसायों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।
खास बात यह है कि श्रीमती सलामे स्वयं भी मसाला निर्माण का व्यवसाय कर रही हैं। इस कार्य से आज उनकी वार्षिक आय लगभग 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं में भी आत्मविश्वास जगाया है और वे भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
श्रीमती छाया सलामे की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि समाज में नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं।

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